Spiritual Awareness

Papankusha Ekadashi (पापांकुशा एकादशी)

युधिष्ठर ने पूछा- हे जनार्दन! आप कृपाकर आश्विन शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम और माहात्म्य सुनाइए।

भगवान श्री कृष्ण बोले- हे राजन! आश्विन शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम पापांकुशा है। इस एकादशी में भगवान पद्मनाभ की पूजा होती है। जो मनुष्य शारंगधर भगवान विष्णु की शरण में जाता है वह निःसंदेह ही यम-यातनाओं से छूट जाता है।

सहस्त्रों अश्वमेध एवं राजसूय यज्ञों के करने का महान फल इस एकादशी व्रत के सोलहवें भाग के पुण्य-फल के समान भी नहीं होता। इस व्रत को करने वाले मनुष्यों के  पितृ-पक्ष के दस कुल, मातृ-पक्ष के दस कुल तथा भार्या-पक्ष के दस कुलों के पितर चतुर्भुज रूप होकर पीताम्बर और वनमाला धारण कर गरुड़ पर चढ़कर विष्णुलोक को जाते हैं।

अश्विन शुक्लपक्ष की पापांकुशा एकादशी का व्रत करके मनुष्य सहज ही समस्त पाप-समूहों को नष्ट करते हैं।

इस कथा को पढ़ने और सुनने वाले भी अक्षय और अतुल पुण्य के भागी होते हैं।

हरे कृष्ण !!

4 responses on "Papankusha Ekadashi (पापांकुशा एकादशी)"

  1. “Hey Nath! Aap param dayalu Kripalu ho.”
    Aapke hridya se anant anant shukrane h.

  2. Guru Bhagwanji ke Anant Anant Shukrane hai,vandan hai.

  3. Anant anant shukrane hain mere Guru Bhagwan ji ke
    Radhe Radhe bhagwanji

  4. Guru Bhagwan ji Ke Anant Anant Shukrane hai apne Bhakti se joda aap bahut kripalu hai?

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